कितनी शराब पीना है सही नहीं तो होते हैं यह परिणाम

कितनी शराब पीना है सही नहीं तो होते हैं यह परिणाम:alcohol

थोड़ी मात्रा में शराब पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। वास्तव में यह हमारी रक्त वाहिकाओं को स्वच्छ कर देता है और हानिकारक वसा को भी दिल के आसपास जमने नहीं देता। परिणाम स्वरुप दिल का दौरा पड़ने की संभावना बहुत कम हो जाती है। लेकिन यदि शराब का बहुत अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो यह शरीर के लिए किसी प्रकार के जहर से कम नहीं है।
यूं तो किसी भी चीज का जरुरत से ज्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ही होता है। परंतु शराब का बताई गई मात्रा से अधिक सेवन या फिर इसका प्रयोग नशे के रूप में किया जाए तो यह लीवर और दिमाग दोनों के लिए ही बहुत खतरनाक होती है। साथ ही इससे कभी-कभी कैंसर होने का खतरा भी बन जाता है।

अधिक मात्रा में शराब पीना केवल शरीर के लिए ही हानिकारक नहीं है। इसके कुछ अन्य सामाजिक दुष्परिणाम भी होते हैं। दरअसल शराब पीने वाला व्यक्ति अपने होश में नहीं रहता है और बेहोशी की हालत में कुछ ऐसे कामों को अंजाम दे देता है। जिसकी वजह से वह समाज में हंसी का पात्र बनकर रह जाता है। नतीजन उसको और उसके परिवार वालों को समाजिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।
इसीलिए शराब को केवल दवाई के रूप में प्रयोग में लाना चाहिए।

कितनी शराब पीना है सही
drink

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग प्रतिदिन एक यूनिट शराब का प्रयोग करते हैं उन्हें इसके शारीरिक तौर पर अच्छे लाभ देखने को मिलते हैं। इसी के विपरीत जो लोग दिन भर में इस से 3 गुना या चार गुना ज्यादा शराब का सेवन करते हैं। उनके शरीर में काफी सारे हानिकारक प्रभाव दिखने लगते हैं। जैसे किडनी का खराब होना, लीवर संबंधित रोग, हाई ब्लड प्रेशर, नींद ना आना आदि। इसीलिए इन सबसे बचने के लिए बताई गई मात्रा में ही शराब का सेवन करना चाहिए।

अधिक शराब से होने वाले दुष्परिणामalcohol drink

जो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन करने लगता है तो उन्हें बहुत से दुष्परिणामों का सामना करना पड़ता है। शराब के सेवन से लीवर सिरोसिस नामक खतरनाक बीमारी हो जाती है। इसके चलते लीवर अपने काम करने की शक्ति को खो देता है और उसमें से खून बहने लगता है। जिससे व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। इसके इलावा शराब पीने के कुछ अन्य दुष्परिणाम इस प्रकार से हैं:-

– घरेलू हिंसा व परिवारिक समस्याएं
– हृदय से जुड़ी समस्याएं
– सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होना
– बाल शोषण करना
– शारीरिक उत्पीड़न देना
– बेरोजगारी
– गर्भावस्था संबंधित समस्याएं व गर्भपात का होना
– असुरक्षित शारीरिक संबंध
– अपराधिक गतिविधियां करना

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