कैसे हुआ था शिव के वाहन नंदी का जन्म

कैसे हुआ था शिव के वाहन नंदी का जन्म:shiv and nandi

नंदी जी शिव के परिवार का एक अहम सदस्य हैं। लेकिन आपने अक्सर उन्हें या तो मंदिर के बाहर या फिर शिवजी से कुछ दूरी पर ही देखा होगा। नंदी जी शिव जी का वाहन है। जिस पर बैठकर भोलेनाथ तीनो लोग की यात्रा करते हैं।
पर आप सभी के मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि नंदी जी का जन्म किस प्रकार से हुआ। तो चलिए आज हम आपको इसके पीछे की एक छोटी सी कथा सुनाने जा रहे हैं।

ऐसे हुआ था नंदी का जन्म

यह कथा शिलाद मुनि जी के बारे में है। शिलाद मुनि एक बहुत ही बड़े तपस्वी थे जो कि ब्रह्मचर्य का पालन करते थे। वह घर गृहस्ती के चक्कर में बंधना नहीं चाहते थे। जिसकी वजह से उनके पितरों को यह डर सताने लगा कि उनका वंश आगे नहीं बढ़ेगा।
पितरों की इस इच्छा को पूरा करने के लिए शिलाद मुनि जी ने इंद्रदेव की कड़ी तपस्या कि और उनसे यह वरदान मांगा कि उन्हें एक ऐसा पुत्र मिले जो जन्म और मृत्यु के चक्कर से परे हो। अर्थार्थ ना तो उसकी कभी मृत्यु हो सके और ना ही पुनर्जन्म। इंद्रदेव ऐसा वरदान देने में असमर्थ थे इसीलिए उन्होंने शिलाद मुनि को शिव की तपस्या करने को प्रेरित किया। उन्होंने शिलाद मुनि से कहा शिव चाहे तो कुछ भी संभव है। अतः तुम्हें अपने वरदान की पूर्ति के लिए शिव की आराधना करनी चाहिए।bhagwaan shiv ko kya chadaye

इंद्रदेव के कहे अनुसार शिलाद मुनि ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की और शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें स्वयं शिलाद मुनि के पुत्र के रुप में प्रकट होने का वरदान दिया। शिव के इसी वरदान के कारण नंदी जी का शिलाद के यहां जन्म हुआ नंदी जी जन्म और मृत्यु के चक्कर से परे हैं।
शिव ने नंदी को यह वरदान दिया कि जहां भी नंदी जी का वास होगा वहां स्वयं वह खुद भी निवास करेंगे।
और जो भी नंदी जी के दर्शन करेगा उनके मन को प्रसन्नता की प्राप्ति होगी। नंदी जी के नेत्र सदा अपने प्रभु को देखते रहते हैं और शिव के समरन में रहते हैं। इसीलिए शिव के मंदिर में जाने पर नंदी जी के दर्शन और उनके सींगो को स्पर्श करना बहुत लाभप्रद माना जाता है। इससे सोया भाग्य भी जाग जाता है।

कहा जाता है कि अपनी मनोकामना को नंदी जी के कानों में कह देने से आपकी मनोकामना पूरी हो जाती है। नंदी जी के कानों में कही गई हर बात सर्वप्रथम शिवजी तक पहुंचती है। और शिवजी नंदी की हर बात सदा स्वीकार करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!