श्रीलंका में अब भी हैं रामायण से जुड़ी जगहे

श्रीलंका में अब भी हैं रामायण से जुड़ी जगहे

लंका का नाम तो आपने सुना ही होगा और टीवी में रामायण के लंका को देखा होगा। कभी अपने सोचा कि श्रीलंका में लंका कहाँ है नही न। श्रीलंका में एक जगह है लंकापुर, यह वही जगह है जहाँ रावण की लंका हुआ करती थी। यहाँ आज भी रावण का महल के अवशेष मौजूद है। इसके अलावा यहाँ कई ऐसे मंदिर और जगहे है जहाँ रामायण काल में महत्वपूर्ण घटनाएं घटी थी। लंकापुरा रावण का गढ़ हुआ करता था। यहां आज भी हनुमान मंदिर, सीता मंदिर, अशोक वाटिका, रावण की साधना करने की जगह मौजूद है। इसके अलावा वह जगह भी है जहां रावण का वध हुआ था।

मंदोदरी महल

सिन्हाला शहर में खूबसूरत मंदोदरी महल है, जो वाटरफॉल और घने जंगलों से घिरा है। रावण ने सीता का हरण करने के बाद मंदोदरी महल में ही रखा था। इसे सीता कोटुवा यानी सीता का किला कहते हैं।

पुष्पक विमान स्थल

यहां सिन्हाला शहर में वेरागनटोटा नाम की एक जगह है, जिसका मतलब ‘विमान उतरने की जगह’ होता है। कहते हैं कि यही वो जगह है, जहां रावण का पुष्पक विमान उतरता था।

युद्ध स्थान

जहाँ राम और रावण का युद्ध हुआ था, उस जगह पर आज भी मिट्टी लाल है और आसपास की जमीन हल्के रंग की है। जिस जगह पर रावण के विमान को हनुमान ने जला दिया था, वहां आज भी जमीन पर जलने के निशान हैं और मिट्टी डार्क ब्राउन रंग की है। श्रीलंका के कुछ पर्वत में आज भी संजीवनी पाई जाती है। यहाँ उन जगहों के नाम आज भी वहीं हैं, जो रामायण काल में हुआ करते थे।

अशोक वाटिका

ये वो जगह है जहाँ रावण ने सीता को महल से लाकर रखा था। यहाँ आज सीता का मंदिर है और पास ही एक झरना भी है। कहते हैं, सीता यहाँ स्नान किया करती थीं। इस झरने के आसपास की चट्टानों पर हनुमान जी के पैरों के निशान भी मिलते हैं। इनमें से कुछ छोटे और कुछ बड़े हैं, जो ये साबित करते हैं कि हनुमान खुद को विराट रूप में भी बदल सकते थे। यहाँ कुछ और भी झरने मिले थे। कहा जाता है कि यहाँ देवता साधना किया करते थे। आज यहाँ झरने के पास राम, सीता, लक्षमण और हनुमान के मंदिर हैं। यहाँ वो पर्वत भी है जहां हनुमान जी ने पहली बार कदम रखा था। इसे पवाला मलाई कहते हैं। ये पर्वत लंकापुरा और अशोक वाटिका के बीच में है।

सीता टियर तालाब

जहाँ से राम का रथ लंका आया था, वो रास्ता आज तक यहाँ दिखाई देता है, क्योंकि उस रास्ते पर कोई भी पेड़-पौधा नहीं लगा। इसी मार्ग पर एक सीता टियर तालाब है। कहा जाता है कि ये सीता के आंसुओं से बना था। ये तालाब तब से आज तक नहीं सूखा, जबकि सूखे के दौरान आसपास की नदियां सूख जाती हैं।

सीता फूल जिसमे दिखते है राम

सीता तालाब के आसपास आपको सीता फूल भी दिख जाएंगे। इन फूलों की खास बात ये है कि इन्हें पास से देखने पर ये ऐसे लगते हैं, जैसे कोई इंसान हाथ में धनुष लिए हो। कहते हैं कि ये राम जी हैं जो सीता को इन फूलों में दिखा करते थे। ये फूल बस इसी जगह पर लगते हैं।

सीता गोली

रामायण में बताया गया था कि जब रावण सीता को अपने विमान में लेकर लंका आ रहे थे, तो रास्ते में रावण ने सीता को पौष्टिक चावल की गोलियां खाने के लिए दी थीं। लेकिन सीता ने रावण का दिया हुआ कुछ भी खाने से मना कर दिया था और रास्ते में इन्हें नीचे बिखेर दिया था। ये गोलियां अभी भी यहाँ जगह-जगह पर मिलती हैं। इतना ही नहीं, यहां के लोग इन्हें सीता गोली कहते हैं और इन्हें अपने बच्चों को पेटदर्द और सिरदर्द दूर करने के लिए देते हैं। किसान इसे शुभ मानकर अपने कैश बॉक्स में रखते हैं। टोक्यो और दिल्ली में इन राइस बॉल्स की टेस्टिंग भी हुई है, जिससे पता चला कि ये 5 हजार साल पुरानी हैं।

जहाँ रावण ने छुपाया था सीता को

यहां रावनागोड़ा नाम की जगह है, कहते हैं कि जब हनुमान ने लंका में अपनी पूंछ से आग लगाई थी, तब रावण ने सीता को इसी जगह पर छुपाया था। इस जगह पर कई गुफाएं और सुरंगें हैं। ये सुरंगें रावण के शहर को अंदर ही अंदर जोड़ती हैं। कुछ लोग बताते हैं कि कई सुरंगें तो साउथ अफ्रीका तक गई हैं, जिनमें रावण ने अपना सोना और खजाना छुपाया था। ये सुरंगें नेचुरल नहीं हैं, बनाई गई हैं।

महल की दीवारों पर इस तरह की नक्काशी जगह-जगह नज़र आएगी।

महल की दीवारों को तराश कर बनाई गई मूर्तियां।

महल की दीवारों पर बनी कलाकृतियां।

 

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